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क्या वाकई नमक में आयोडीन मिलाना जरुरी है!

जिस नमक के लिए गाँधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह किया था , उसी नमक को विदेशी यानी बहु राष्ट्रीय कम्पनियाँ अच्छे दामों में बेच रही हैं यह काम बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ जबरदस्त प्रचार के माध्यम से करके दोनों हाथों धन बटोर रही हैं . धन कमाने में इनका सहयोग सरकार यह प्रचार करके कर रही है कि आयोडीन युक्त नमक न खाने से सिर्फ घेंघा रोग होता है ,बल्कि बच्चे विकलांगता के शिकार भी हो सकते हैं . विशेषज्ञों के मुताबिक , इस प्रकार का प्रचार करना गलत है , क्योंकि शरीर को रोजाना १००-१५० माइक्रोग्राम आयोडीन की ही जरुरत होती है .
आम भारतीयों की यह जरुरत साधारण नमक,अनाज ,सब्जियों , मांस – मछली आदि से पूरी हो जाती है वे भोजन के जरिये २५०-२९६ माइक्रोग्राम आयोडीन प्राप्त कर लेते हैं . इसलिये अलग से आयोडीन लेने की कोई जरुरत नहीं है .विशेषज्ञों के मुताबिक ज्यादा आयोडीन लेने से ‘हाइपर थाइरेक्सिया ‘रोग पनप सकता है . हिमालय की तराई को छोड़ , ऐसी कोई जगह नहीं है जहाँ प्राकृतिक स्रोतों से आयोडीन की पर्याप्त मात्रा न मिलती हो . सूत्रों के अनुसार , बहुराष्ट्रीय कम्पनियां सरकारी नीतियों का फायदा उठा रही हैं . ये कम्पनियाँ समुद्र के पानी से खुद नमक नहीं तैयार करतीं . किसानों से सादा नमक औने – पौने दाम पर खरीदकर आयोडाइज्ड करती हैं . नमक को आयोडाइज्ड करने में प्रति किलो सिर्फ पांच नये पैसे खर्च आता है .जबकि विदेशी कंपनी का आयोडाइज्ड नमक १५-२० रूपये प्रति किलो के हिसाब से बाजार में बेचा जाता है. आयोडाइज्ड नमक में आयोडीन की मौजूदगी सिर्फ दो महीने ही रहती है ,और आमतौर पर बाजार इससे कहीं पुराने पैकेट बिकते हैं . जाहिर सी बात है कि ऐसे पैकेट कहने को ही आयोडीन युक्त होते हैं . कम्पनियाँ नमक के पैकेट पर आयोडीन की मात्रा का भी उल्लेख नहीं करती हैं न ही इसकी कोई जाँच होती है कि कम्पनी नमक में आयोडीन मिलाती भी है कि नहीं

‘एस एस मिडिया डेस्क ‘

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