प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक में विवेक ओबेरॉय ने किया निराश

तमाम विवादों के बाद आज रिलीज हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। एक तरफ लोगों में नरेंद्र मोदी की दोबारा जीत को लेकर उत्साह है और दूसरी तरफ लोग उनकी जिंदगी को परदे पर देखना चाहते हैं। लेकिन लोगों का मानना है कि यह रोल और बेहतर ढंग से किया जा सकता था।

पीएम नरेंद्र मोदी एक ऐसे शख्स की गुणगाथा है, जिसने बचपन मुफलिसी में गुजारा, जवानी में ही मां का आशीर्वाद लेकर संन्यासी बन गया, गुरु के कहने पर बस्ती में लौटा और अपनी ही पार्टी की अंदरूनी सियासत से जूझकर जननायक बना। वह गुजरात का पहला किंगमेकर है, जिसकी शोहरत से गांधीनगर से लेकर दिल्ली तक में हलचल है।फिल्म का निर्देशन ओमंग कुमार ने किया है, जो इसके पहले ‘मैरी कॉम’ और ‘सरबजीत’ जैसी बायोपिक्स बनाकर अपना एक फैनबेस तैयार कर चुके हैं।

फिल्म की कहानी मोदी के चाय बेचने से लेकर देशसेवा करने तक और फिर प्रधानमंत्री बनने तक के सफर को द‍िखाती है। फिल्म की कहानी का अंत साल 2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम पद की शपथ लेने पर होता है।
यह फिल्म एक माह पहले अप्रैल में रिलीज होने वाली थी, लेकिन चुनाव संहिता लागू होने के कारण इसकी रिलीज डेट आगे बढ़ाना पड़ा था।

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